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टाइटैनिक जब आइसबर्ग से टकराया, तो वह तुरंत नहीं डूबा! समय लगा डूबने में!

 टाइटैनिक जब आइसबर्ग से टकराया, तो वह तुरंत नहीं डूबा! समय लगा डूबने में!

कप्तान को टक्कर की गंभीरता का एहसास हो चुका था!

टाइटैनिक डूबने लगा, 

तो सबसे पहले थर्ड क्लास वालों का कम्पार्टमेंट चपेट में आया! उसमें आम शहरी थे! मध्यमवर्गीय थे! 

इंजन के संचालन के लिए भट्ठी में कोयला झोंकने वाला मजदूर वर्ग था!


उधर फर्स्ट क्लास वाले आने वाली विपत्ति से अनजान अपनी अलग ही खुमारी में मस्त थे! लेकिन टक्कर इतनी भयंकर थी कि पूरा टाइटैनिक ही डूब गया! हजारों लोग मारे गए! जो बचे, उनमें भी अधिकांश धनवान ही थे!


टाइटैनिक दुर्घटना की जिम्मेदारी कप्तान ने ली और उसने जहाज के साथ ही जलसमाधि ले ली!


अब इन साहब से मिलिये!

इन साहब ने 

अच्छी खासी दौड़ रही अर्थव्यवस्था (टाइटैनिक) को.. 

नोटबंदी और GST नामक दो आइसबर्गों से भिड़ा दिया!

 

इम्पैक्ट के एक साल तक कुछ ख़ास असर नहीं हुआ तो इनको लगा सबकुछ ठीक है! 

 ..तो लगे शेखी बघारने! अर्थशास्त्रियों (कप्तानों) को भला बुरा कहने लगे!


टाइटैनिक अभी नोटबंदी और GST के झटके से उबरा भी नहीं था कि कोरोना नामक आइसबर्ग रास्ते में आ गया!


प्रहरियों अर्थशास्त्रियों ने चेताया भी कि सामने आइसबर्ग है! लेकिन साहब तो हुनर हाट में लिट्टी चोखा चांपने में व्यस्त थे!


....और जहाज टकरा गया!


साहब घर में बैठकर उलूल जुलूल हरकतें करवाने लगे! 

कभी ताली बजवाई तो कभी घण्टा! 

दीये मशाल सब जलवा लिए! सब अकारथ गया!


नतीजा?

_करोड़ों लोग संक्रमित हो गए!

_लाख लाखों लोग मारे गए!

_करोड़ों लोगों की नौकरियां चली गयीं!

_लाखों लोग शहरों को छोड़कर वापस गांव चले आये!

_GDP 150 सालों के न्यूनतम स्तर को छू रही है!


और कप्तान?

500 मामलों पर ताली-थाली मोमबत्ती-दीया का जश्न मनाने वाला कप्तान, 

मोर चराने बैठ गया.